श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

आत्मा वै पुत्र उत्पन्‍न इति वेदानुशासनम्।

तस्मादस्य भवेद् वक्ता आयुरिन्द्रियसत्त्ववान्॥ ३६

ātmā vai putra utpanna iti vedānuśāsanam|

tasmādasya bhaved vaktā āyurindriyasattvavān|| 36

अर्थ

भगवान् बलरामने कहा—ऋषियो! वेदोंका ऐसा कहना है कि आत्मा ही पुत्रके रूपमें उत्पन्‍न होता है। इसलिये रोमहर्षणके स्थानपर उनका पुत्र आपलोगोंको पुराणोंकी कथा सुनायेगा। उसे मैं अपनी शक्तिसे दीर्घायु, इन्द्रियशक्ति और बल दिये देता हूँ॥ ३६॥

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