॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.78.35
ऋषय ऊचुः
अस्त्रस्य तव वीर्यस्य मृत्योरस्माकमेव च।
यथा भवेद् वचः सत्यं तथा राम विधीयताम्॥ ३५
astrasya tava vīryasya mṛtyorasmākameva ca|
yathā bhaved vacaḥ satyaṃ tathā rāma vidhīyatām|| 35
अर्थ
ऋषियोंने कहा—बलरामजी! आप ऐसा कोई उपाय कीजिये जिससे आपका शस्त्र, पराक्रम और इनकी मृत्यु भी व्यर्थ न हो और हमलोगोंने इन्हें जो वरदान दिया था, वह भी सत्य हो जाय॥ ३५॥