श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

सोऽर्चितः सपरीवारः कृतासनपरिग्रहः।

रोमहर्षणमासीनं महर्षेः शिष्यमैक्षत॥ २२

so'rcitaḥ saparīvāraḥ kṛtāsanaparigrahaḥ|

romaharṣaṇamāsīnaṃ maharṣeḥ śiṣyamaikṣata|| 22

अर्थ

वे अपने साथियोंके साथ आसन ग्रहण करके बैठ गये और उनकी अर्चा-पूजा हो चुकी, तब उन्होंने देखा कि भगवान् व्यासके शिष्य रोमहर्षण व्यासगद्दीपर बैठे हुए हैं॥ २२॥

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