दीर्घकालतक सत्संगसत्रका नियम लेकर बैठे हुए ऋषियोंने बलरामजीको आया देख अपने-अपने आसनोंसे उठकर उनका स्वागत-सत्कार किया और यथायोग्य प्रणाम-आशीर्वाद करके उनकी पूजा की॥ २१॥
तमागतमभिप्रेत्य मुनयो दीर्घसत्रिणः।
अभिनन्द्य यथान्यायं प्रणम्योत्थाय चार्चयन्॥ २१
दीर्घकालतक सत्संगसत्रका नियम लेकर बैठे हुए ऋषियोंने बलरामजीको आया देख अपने-अपने आसनोंसे उठकर उनका स्वागत-सत्कार किया और यथायोग्य प्रणाम-आशीर्वाद करके उनकी पूजा की॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.78.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 613) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/78/21/