परीक्षित्! तदनन्तर यमुनातट और गंगातटके प्रधान-प्रधान तीर्थोंमें होते हुए वे नैमिषारण्य क्षेत्रमें गये। उन दिनों नैमिषारण्य क्षेत्रमें बड़े-बड़े ऋषि सत्संगरूप महान् सत्र कर रहे थे॥ २०॥
यमुनामनु यान्येव गंगामनु च भारत।
जगाम नैमिषं यत्र ऋषयः सत्रमासते॥ २०
परीक्षित्! तदनन्तर यमुनातट और गंगातटके प्रधान-प्रधान तीर्थोंमें होते हुए वे नैमिषारण्य क्षेत्रमें गये। उन दिनों नैमिषारण्य क्षेत्रमें बड़े-बड़े ऋषि सत्संगरूप महान् सत्र कर रहे थे॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.78.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 612) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/78/20/