॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.78.19
पृथूदकं बिन्दुसरस्त्रितकूपं सुदर्शनम्।
विशालं ब्रह्मतीर्थं च चक्रं प्राचीं सरस्वतीम्॥ १९
pṛthūdakaṃ bindusarastritakūpaṃ sudarśanam|
viśālaṃ brahmatīrthaṃ ca cakraṃ prācīṃ sarasvatīm|| 19
अर्थ
वे क्रमशः पृथूदक, बिन्दुसर, त्रितकूप, सुदर्शनतीर्थ, विशालतीर्थ, ब्रह्मतीर्थ, चक्रतीर्थ और पूर्ववाहिनी सरस्वती आदि तीर्थोंमें गये॥ १९॥