श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

श्रुत्वा युद्धोद्यमं रामः कुरूणां सह पाण्डवैः।

तीर्थाभिषेकव्याजेन मध्यस्थः प्रययौ किल॥ १७

śrutvā yuddhodyamaṃ rāmaḥ kurūṇāṃ saha pāṇḍavaiḥ|

tīrthābhiṣekavyājena madhyasthaḥ prayayau kila|| 17

अर्थ

एक बार बलरामजीने सुना कि दुर्योधनादि कौरव पाण्डवोंके साथ युद्ध करनेकी तैयारी कर रहे हैं। वे मध्यस्थ थे, उन्हें किसीका पक्ष लेकर लड़ना पसंद नहीं था। इसलिये वे तीर्थोंमें स्नान करनेके बहाने द्वारकासे चले गये॥ १७॥

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