योगेश्वर एवं जगदीश्वर भगवान् श्रीकृष्ण इसी प्रकार अनेकों खेल खेलते रहते हैं। जो पशुओंके समान अविवेकी हैं, वे उन्हें कभी हारते भी देखते हैं। परन्तु वास्तवमें तो वे सदा-सर्वदा विजयी ही हैं॥ १६॥
एवं योगेश्वरः कृष्णो भगवान् जगदीश्वरः।
ईयते पशुदृष्टीनां निर्जितो जयतीति सः॥ १६
योगेश्वर एवं जगदीश्वर भगवान् श्रीकृष्ण इसी प्रकार अनेकों खेल खेलते रहते हैं। जो पशुओंके समान अविवेकी हैं, वे उन्हें कभी हारते भी देखते हैं। परन्तु वास्तवमें तो वे सदा-सर्वदा विजयी ही हैं॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.78.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 612) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/78/16/