श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.52

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

राज्ञा सभाजिताः सर्वे सुरमानवखेचराः।

कृष्णं क्रतुं च शंसन्तः स्वधामानि ययुर्मुदा॥ ५२

rājñā sabhājitāḥ sarve suramānavakhecarāḥ|

kṛṣṇaṃ kratuṃ ca śaṃsantaḥ svadhāmāni yayurmudā|| 52

अर्थ

राजा युधिष्ठिरने देवता, मनुष्य और आकाशचारियोंका यथायोग्य सत्कार किया तथा वे भगवान् श्रीकृष्ण एवं राजसूय यज्ञकी प्रशंसा करते हुए बड़े आनन्दसे अपने-अपने लोकको चले गये॥ ५२॥

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