श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.41

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

एकदा मातुलेयं वै प्राह राजन् वृकोदरः।

न शक्तोऽहं जरासन्धं निर्जेतुं युधि माधव॥ ४१

ekadā mātuleyaṃ vai prāha rājan vṛkodaraḥ|

na śakto'haṃ jarāsandhaṃ nirjetuṃ yudhi mādhava|| 41

अर्थ

प्रिय परीक्षित्! अट्ठाईसवें दिन भीमसेनने अपने ममेरे भाई श्रीकृष्णसे कहा—‘श्रीकृष्ण! मैं युद्धमें जरासन्धको जीत नहीं सकता॥ ४१॥

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