श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

एवं तयोर्महाराज युध्यतोः सप्तविंशतिः।

दिनानि निरगंस्तत्र सुहृद्वन्‍निशि तिष्ठतोः॥ ४०

evaṃ tayormahārāja yudhyatoḥ saptaviṃśatiḥ|

dināni niragaṃstatra suhṛdvanniśi tiṣṭhatoḥ|| 40

अर्थ

दोनों वीर रातके समय मित्रके समान रहते और दिनमें छूटकर एक-दूसरेपर प्रहार करते और लड़ते। महाराज! इस प्रकार उनके लड़ते-लड़ते सत्ताईस दिन बीत गये॥ ४०॥

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