ते विजित्य नृपान् वीरा आजह्रुर्दिग्भ्य ओजसा।✎ 1186
अजातशत्रवे भूरि द्रविणं नृप यक्ष्यते॥ १४
te vijitya nṛpān vīrā ājahrurdigbhya ojasā|
ajātaśatrave bhūri draviṇaṃ nṛpa yakṣyate|| 14
अर्थ
परीक्षित्! उन भीमसेन आदि वीरोंने अपने बल-पौरुषसे सब ओरके नरपतियोंको जीत लिया और यज्ञ करनेके लिये उद्यत महाराज युधिष्ठिरको बहुत-सा धन लाकर दिया॥ १४॥
ते विजित्य नृपान् वीरा आजह्रुर्दिग्भ्य ओजसा।
अजातशत्रवे भूरि द्रविणं नृप यक्ष्यते॥ १४
परीक्षित्! उन भीमसेन आदि वीरोंने अपने बल-पौरुषसे सब ओरके नरपतियोंको जीत लिया और यज्ञ करनेके लिये उद्यत महाराज युधिष्ठिरको बहुत-सा धन लाकर दिया॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.72.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 582) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/72/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1186 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): आजहृर्दिग्भ्य → आजह्रुर्दिग्भ्य