श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

सहदेवं दक्षिणस्यामादिशत् सह सृंजयैः।

दिशि प्रतीच्यां नकुलमुदीच्यां सव्यसाचिनम्।

प्राच्यां वृकोदरं मत्स्यैः केकयैः सह मद्रकैः॥ १३

sahadevaṃ dakṣiṇasyāmādiśat saha sṛṃjayaiḥ|

diśi pratīcyāṃ nakulamudīcyāṃ savyasācinam|

prācyāṃ vṛkodaraṃ matsyaiḥ kekayaiḥ saha madrakaiḥ|| 13

अर्थ

धर्मराज युधिष्ठिरने सृंजयवंशी वीरोंके साथ सहदेवको दक्षिण दिशामें दिग्विजय करनेके लिये भेजा। नकुलको मत्स्यदेशीय वीरोंके साथ पश्‍चिममें, अर्जुनको केकयदेशीय वीरोंके साथ उत्तरमें और भीमसेनको मद्रदेशीय वीरोंके साथ पूर्व दिशामें दिग्विजय करनेका आदेश दिया॥ १३॥

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