॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.70.13
संविभज्याग्रतो विप्रान् स्रक्ताम्बूलानुलेपनैः।
सुहृदः प्रकृतीर्दारानुपायुंक्त ततः स्वयम्॥ १३
saṃvibhajyāgrato viprān sraktāmbūlānulepanaiḥ|
suhṛdaḥ prakṛtīrdārānupāyuṃkta tataḥ svayam|| 13
अर्थ
वे पुष्पमाला, ताम्बूल, चन्दन और अंगराग आदि वस्तुएँ पहले ब्राह्मण, स्वजनसम्बन्धी, मन्त्री और रानियोंको बाँट देते; और उनसे बची हुई स्वयं अपने काममें लाते॥ १३॥