॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.70.12
अवेक्ष्याज्यं तथाऽऽदर्शं गोवृषद्विजदेवताः।
कामांश्च सर्ववर्णानां पौरान्तःपुरचारिणाम्।
प्रदाप्य प्रकृतीः कामैः प्रतोष्य प्रत्यनन्दत॥ १२
avekṣyājyaṃ tathā''darśaṃ govṛṣadvijadevatāḥ|
kāmāṃśca sarvavarṇānāṃ paurāntaḥpuracāriṇām|
pradāpya prakṛtīḥ kāmaiḥ pratoṣya pratyanandata|| 12
अर्थ
इसके बाद वे घी और दर्पणमें अपना मुखारविन्द देखते; गाय, बैल, ब्राह्मण और देव-प्रतिमाओंका दर्शन करते। फिर पुरवासी और अन्तःपुरमें रहनेवाले चारों वर्णोंके लोगोंकी अभिलाषाएँ पूर्ण करते और फिर अपनी अन्य (ग्रामवासी) प्रजाकी कामनापूर्ति करके उसे सन्तुष्ट करते और इन सबको प्रसन्न देखकर स्वयं बहुत ही आनन्दित होते॥ १२॥