भगवान् यह सब करते होते, तबतक दारुक नामका सारथि सुग्रीव आदि घोड़ोंसे जुता हुआ अत्यन्त अद्भुत रथ ले आता और प्रणाम करके भगवान्के सामने खड़ा हो जाता॥ १४॥
तावत् सूत उपानीय स्यन्दनं परमाद्भुतम्।
सुग्रीवाद्यैर्हयैर्युक्तं प्रणम्यावस्थितोऽग्रतः॥ १४
भगवान् यह सब करते होते, तबतक दारुक नामका सारथि सुग्रीव आदि घोड़ोंसे जुता हुआ अत्यन्त अद्भुत रथ ले आता और प्रणाम करके भगवान्के सामने खड़ा हो जाता॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.70.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 568) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/70/14/