श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

ब्रह्मन् धर्मस्य वक्ताहं कर्ता तदनुमोदिता।

तच्छिक्षयँल्लोकमिममास्थितः पुत्र मा खिदः॥ ४०

brahman dharmasya vaktāhaṃ kartā tadanumoditā|

tacchikṣayam̐llokamimamāsthitaḥ putra mā khidaḥ|| 40

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—देवर्षि नारदजी! मैं ही धर्मका उपदेशक, पालन करनेवाला और उसका अनुष्ठान करनेवालोंका अनुमोदनकर्ता भी हूँ। इसलिये संसारको धर्मकी शिक्षा देनेके उद्देश्यसे ही मैं इस प्रकार धर्मका आचरण करता हूँ। मेरे प्यारे पुत्र! तुम मेरी यह योगमाया देखकर मोहित मत होना॥ ४०॥

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