श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

अनुजानीहि मां देव लोकांस्ते यशसाऽऽप्लुतान्।

पर्यटामि तवोद्गायन् लीलां भुवनपावनीम्॥ ३९

anujānīhi māṃ deva lokāṃste yaśasā''plutān|

paryaṭāmi tavodgāyan līlāṃ bhuvanapāvanīm|| 39

अर्थ

देवताओंके भी आराध्यदेव भगवन्! चौदहों भुवन आपके सुयशसे परिपूर्ण हो रहे हैं। अब मुझे आज्ञा दीजिये कि मैं आपकी त्रिभुवन-पावनी लीलाका गान करता हुआ उन लोकोंमें विचरण करूँ’॥ ३९॥✎ 1706

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1706 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: योग-माया → योगमाया

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