श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.41

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

इत्याचरन्तं सद्धर्मान् पावनान् गृहमेधिनाम्।

तमेव सर्वगेहेषु सन्तमेकं ददर्श ह॥ ४१

ityācarantaṃ saddharmān pāvanān gṛhamedhinām|

tameva sarvageheṣu santamekaṃ dadarśa ha|| 41

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्ण गृहस्थोंको पवित्र करनेवाले श्रेष्ठ धर्मोंका आचरण कर रहे थे। यद्यपि वे एक ही हैं, फिर भी देवर्षि नारदजीने उनको उनकी प्रत्येक पत्‍नीके महलमें अलग-अलग देखा॥ ४१॥

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