taṃ te jighṛkṣavaḥ kruddhāstiṣṭha tiṣṭheti bhāṣiṇaḥ|
āsādya dhanvino bāṇaiḥ karṇāgraṇyaḥ samākiran|| 7
अर्थ
इधर कर्णको मुखिया बनाकर कौरववीर धनुष चढ़ाये हुए साम्बके पास आ पहुँचे और क्रोधमें भरकर उनको पकड़ लेनेकी इच्छासे ‘खड़ा रह! खड़ा रह!’ इस प्रकार ललकारते हुए बाणोंकी वर्षा करने लगे॥ ७॥✎ 1858
तं ते जिघृक्षवः क्रुद्धास्तिष्ठ तिष्ठेति भाषिणः।
आसाद्य धन्विनो बाणैः कर्णाग्रण्यः समाकिरन्॥ ७
इधर कर्णको मुखिया बनाकर कौरववीर धनुष चढ़ाये हुए साम्बके पास आ पहुँचे और क्रोधमें भरकर उनको पकड़ लेनेकी इच्छासे ‘खड़ा रह! खड़ा रह!’ इस प्रकार ललकारते हुए बाणोंकी वर्षा करने लगे॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 554) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/68/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1858 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): ्सिंहके → सिंहके