श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

सोऽपविद्धः कुरुश्रेष्ठ कुरुभिर्यदुनन्दनः।

नामृष्यत्तदचिन्त्यार्भः सिंहः क्षुद्रमृगैरिव॥ ८

so'paviddhaḥ kuruśreṣṭha kurubhiryadunandanaḥ|

nāmṛṣyattadacintyārbhaḥ siṃhaḥ kṣudramṛgairiva|| 8

अर्थ

परीक्षित्! यदुनन्दन साम्ब अचिन्त्यैश्‍वर्यशाली भगवान् श्रीकृष्णके पुत्र थे। कौरवोंके प्रहारसे वे उनपर चिढ़ गये, जैसे सिंह तुच्छ हरिनोंका पराक्रम देखकर चिढ़ जाता है॥ ८॥✎ 1858

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1858 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): ्सिंहके → सिंहके

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