जब महारथी साम्बने देखा कि धृतराष्ट्रके पुत्र मेरा पीछा कर रहे हैं, तब वे एक सुन्दर धनुष चढ़ाकर सिंहके समान अकेले ही रणभूमिमें डट गये॥ ६॥✎ 1858
दृष्ट्वानुधावतः साम्बो धार्तराष्ट्रान् महारथः।
प्रगृह्य रुचिरं चापं तस्थौ सिंह इवैकलः॥ ६
जब महारथी साम्बने देखा कि धृतराष्ट्रके पुत्र मेरा पीछा कर रहे हैं, तब वे एक सुन्दर धनुष चढ़ाकर सिंहके समान अकेले ही रणभूमिमें डट गये॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 554) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/68/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1858 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): ्सिंहके → सिंहके