समस्त शक्तियोंको धारण करनेवाले सर्वप्राणिस्वरूप अविनाशी भगवन्! आपको हम नमस्कार करते हैं। समस्त विश्वके रचयिता देव! हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं। हम आपकी शरणमें हैं। आप कृपा करके हमारी रक्षा कीजिये’॥ ४८॥
नमस्ते सर्वभूतात्मन् सर्वशक्तिधराव्यय।
विश्वकर्मन् नमस्तेऽस्तु त्वां वयं शरणं गताः॥ ४८
समस्त शक्तियोंको धारण करनेवाले सर्वप्राणिस्वरूप अविनाशी भगवन्! आपको हम नमस्कार करते हैं। समस्त विश्वके रचयिता देव! हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं। हम आपकी शरणमें हैं। आप कृपा करके हमारी रक्षा कीजिये’॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 559) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/68/48/