और कहने लगे—‘लोकाभिराम बलरामजी! आप सारे जगत्के आधार शेषजी हैं। हम आपका प्रभाव नहीं जानते। प्रभो! हमलोग मूढ़ हो रहे हैं, हमारी बुद्धि बिगड़ गयी है; इसलिये आप हमलोगोंका अपराध क्षमा कर दीजिये॥ ४४॥
राम रामाखिलाधार प्रभावं न विदाम ते।
मूढानां नः कुबुद्धीनां क्षन्तुमर्हस्यतिक्रमम्॥ ४४
और कहने लगे—‘लोकाभिराम बलरामजी! आप सारे जगत्के आधार शेषजी हैं। हम आपका प्रभाव नहीं जानते। प्रभो! हमलोग मूढ़ हो रहे हैं, हमारी बुद्धि बिगड़ गयी है; इसलिये आप हमलोगोंका अपराध क्षमा कर दीजिये॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 559) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/68/44/