श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.43

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

तमेव शरणं जग्मुः सकुटुम्बा जिजीविषवः।

सलक्ष्मणं पुरस्कृत्य साम्बं प्रांजलयः प्रभुम्॥ ४३

tameva śaraṇaṃ jagmuḥ sakuṭumbā jijīviṣavaḥ|

salakṣmaṇaṃ puraskṛtya sāmbaṃ prāṃjalayaḥ prabhum|| 43

अर्थ

फिर उन लोगोंने लक्ष्मणाके साथ साम्बको आगे किया और अपने प्राणोंकी रक्षाके लिये कुटुम्बके साथ हाथ जोड़कर सर्वशक्तिमान् उन्हीं भगवान् बलरामजीकी शरणमें गये॥ ४३॥

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