श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

वीर्यशौर्यबलोन्‍नद्धमात्मशक्तिसमं वचः।

कुरवो बलदेवस्य निशम्योचुः प्रकोपिताः॥ २३

vīryaśauryabalonnaddhamātmaśaktisamaṃ vacaḥ|

kuravo baladevasya niśamyocuḥ prakopitāḥ|| 23

अर्थ

परीक्षित्! बलरामजीकी वाणी वीरता, शूरता और बल-पौरुषके उत्कर्षसे परिपूर्ण और उनकी शक्तिके अनुरूप थी। यह बात सुनकर कुरुवंशी क्रोधसे तिलमिला उठे। वे कहने लगे—॥ २३॥✎ 1703

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1703 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: तिल-मिला → तिलमिला

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