॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.68.22
यद् यूयं बहवस्त्वेकं जित्वाधर्मेण धार्मिकम्।
अबध्नीताथ तन्मृष्ये बन्धूनामैक्यकाम्यया॥ २२
yad yūyaṃ bahavastvekaṃ jitvādharmeṇa dhārmikam|
abadhnītātha tanmṛṣye bandhūnāmaikyakāmyayā|| 22
अर्थ
उग्रसेनजीने कहा है—हम जानते हैं कि तुमलोगोंने कइयोंने मिलकर अधर्मसे अकेले धर्मात्मा साम्बको हरा दिया और बंदी कर लिया है। यह सब हम इसलिये सह लेते हैं कि हम सम्बन्धियोंमें परस्पर फूट न पड़े, एकता बनी रहे। (अतः अब झगड़ा मत बढ़ाओ, साम्बको उसकी नववधूके साथ हमारे पास भेज दो)॥ २२॥