kumāraṃ svasya kanyāṃ ca svapuraṃ jayino'viśan|| 12
अर्थ
इस प्रकार कौरवोंने युद्धमें बड़ी कठिनाई और कष्टसे साम्बको रथहीन करके बाँध लिया। इसके बाद वे उन्हें तथा अपनी कन्या लक्ष्मणाको लेकर जय मनाते हुए हस्तिनापुर लौट आये॥ १२॥✎ 1702
तं बद्ध्वा विरथीकृत्य कृच्छ्रेण कुरवो युधि।
कुमारं स्वस्य कन्यां च स्वपुरं जयिनोऽविशन्॥ १२
इस प्रकार कौरवोंने युद्धमें बड़ी कठिनाई और कष्टसे साम्बको रथहीन करके बाँध लिया। इसके बाद वे उन्हें तथा अपनी कन्या लक्ष्मणाको लेकर जय मनाते हुए हस्तिनापुर लौट आये॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 555) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/68/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)