इसके बाद उन छहों वीरोंने एक साथ मिलकर साम्बको रथहीन कर दिया। चार वीरोंने एक-एक बाणसे उनके चार घोड़ोंको मारा, एकने सारथिको और एकने साम्बका धनुष काट डाला॥ ११॥✎ 1702
तं तु ते विरथं चक्रुश्चत्वारश्चतुरो हयान्।
एकस्तु सारथिं जघ्ने चिच्छेदान्यः शरासनम्॥ ११
इसके बाद उन छहों वीरोंने एक साथ मिलकर साम्बको रथहीन कर दिया। चार वीरोंने एक-एक बाणसे उनके चार घोड़ोंको मारा, एकने सारथिको और एकने साम्बका धनुष काट डाला॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 555) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/68/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)