श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

तच्छ्रुत्वा नारदोक्तेन राजन् संजातमन्यवः।

कुरून् प्रत्युद्यमं चक्रुरुग्रसेनप्रचोदिताः॥ १३

tacchrutvā nāradoktena rājan saṃjātamanyavaḥ|

kurūn pratyudyamaṃ cakrurugrasenapracoditāḥ|| 13

अर्थ

परीक्षित्! नारदजीसे यह समाचार सुनकर यदुवंशियोंको बड़ा क्रोध आया। वे महाराज उग्रसेनकी आज्ञासे कौरवोंपर चढ़ाई करनेकी तैयारी करने लगे॥ १३॥

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