परीक्षित्! आँधी आनेपर जैसे जलमें डोंगी डगमगाने लगती है, वैसे ही उसके गिरनेसे बड़े-बड़े वृक्षों और चोटियोंके साथ सारा पर्वत हिल गया॥ २६॥
चकम्पे तेन पतता सटंकः सवनस्पतिः।
पर्वतः कुरुशार्दूल वायुना नौरिवाम्भसि॥ २६
परीक्षित्! आँधी आनेपर जैसे जलमें डोंगी डगमगाने लगती है, वैसे ही उसके गिरनेसे बड़े-बड़े वृक्षों और चोटियोंके साथ सारा पर्वत हिल गया॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.67.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 553) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/67/26/