॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.62.33
स तं प्रविष्टं वृतमाततायिभि-
र्भटैरनीकैरवलोक्य माधवः।
उद्यम्य मौर्वं परिघं व्यवस्थितो
यथान्तको दण्डधरो जिघांसया॥ ३३
sa taṃ praviṣṭaṃ vṛtamātatāyibhi-
rbhaṭairanīkairavalokya mādhavaḥ|
udyamya maurvaṃ parighaṃ vyavasthito
yathāntako daṇḍadharo jighāṃsayā|| 33
अर्थ
जब अनिरुद्धजीने देखा कि बाणासुर बहुत-से आक्रमणकारी शस्त्रास्त्रसे सुसज्जित वीर सैनिकोंके साथ महलोंमें घुस आया है, तब वे उन्हें धराशायी कर देनेके लिये लोहेका एक भयंकर परिघ लेकर डट गये, मानो स्वयं कालदण्ड लेकर मृत्यु (यम) खड़ा हो॥ ३३॥