भगवान् श्रीकृष्ण समस्त जगत्को शिक्षा देनेवाले और सर्वव्यापक हैं। वे इसी प्रकार दूसरी पत्नियोंके महलोंमें भी गृहस्थोंके समान रहते और गृहस्थोचित धर्मका पालन करते थे॥ ५९॥
तथान्यासामपि विभुर्गृहेषु गृहवानिव।
आस्थितो गृहमेधीयान् धर्मांल्लोकगुरुर्हरिः॥ ५९
भगवान् श्रीकृष्ण समस्त जगत्को शिक्षा देनेवाले और सर्वव्यापक हैं। वे इसी प्रकार दूसरी पत्नियोंके महलोंमें भी गृहस्थोंके समान रहते और गृहस्थोचित धर्मका पालन करते थे॥ ५९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.60.59 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 520) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/60/59/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1182 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): धर्माल्ँलोकगुरुर्हरि:॥ → धर्माल्लोकगुरुर्हरिः॥
#1183 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): धर्माल्लोकगुरुर्हरि:॥ → धर्मांल्लोकगुरुर्हरिः॥