॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.60.50
यान् यान् कामयसे कामान् मय्यकामाय भामिनि।
सन्ति ह्येकान्तभक्तायास्तव कल्याणि नित्यदा॥ ५०
yān yān kāmayase kāmān mayyakāmāya bhāmini|
santi hyekāntabhaktāyāstava kalyāṇi nityadā|| 50
अर्थ
सुन्दरी! तुम मेरी अनन्य प्रेयसी हो। मेरे प्रति तुम्हारा अनन्य प्रेम है। तुम मुझसे जो-जो अभिलाषाएँ करती हो, वे तो तुम्हें सदा-सर्वदा प्राप्त ही हैं। और यह बात भी है कि मुझसे की हुई अभिलाषाएँ सांसारिक कामनाओंके समान बन्धनमें डालनेवाली नहीं होतीं, बल्कि वे समस्त कामनाओंसे मुक्त कर देती हैं॥ ५०॥