श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.60.49

दशम स्कन्ध · अध्याय 60 · अथ षष्टितमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

साध्व्येतच्छ्रोतुकामैस्त्वं राजपुत्रि प्रलम्भिता।

मयोदितं यदन्वात्थ सर्वं तत् सत्यमेव हि॥ ४९

sādhvyetacchrotukāmaistvaṃ rājaputri pralambhitā|

mayoditaṃ yadanvāttha sarvaṃ tat satyameva hi|| 49

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—साध्वी! राजकुमारी! यही बातें सुननेके लिये तो मैंने तुमसे हँसी-हँसीमें तुम्हारी वंचना की थी, तुम्हें छकाया था। तुमने मेरे वचनोंकी जैसी व्याख्या की है, वह अक्षरशः सत्य है॥ ४९॥

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