श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.60.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 60 · अथ षष्टितमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

मा मा वैदर्भ्यसूयेथा जाने त्वां मत्परायणाम्।

त्वद्वचः श्रोतुकामेन क्ष्वेल्याऽऽचरितमंगने॥ २९

mā mā vaidarbhyasūyethā jāne tvāṃ matparāyaṇām|

tvadvacaḥ śrotukāmena kṣvelyā''caritamaṃgane|| 29

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—विदर्भनन्दिनी! तुम मुझसे बुरा मत मानना। मुझसे रूठना नहीं। मैं जानता हूँ कि तुम एकमात्र मेरे ही परायण हो। मेरी प्रिय सहचरी! तुम्हारी प्रेमभरी बात सुननेके लिये ही मैंने हँसी-हँसीमें यह छलना की थी॥ २९॥✎ 2119

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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