जब उन राजकुमारियोंने अन्तःपुरमें पधारे हुए नरश्रेष्ठ भगवान् श्रीकृष्णको देखा, तब वे मोहित हो गयीं और उन्होंने उनकी अहैतुकी कृपा तथा अपना सौभाग्य समझकर मन-ही-मन भगवान्को अपने परम प्रियतम पतिके रूपमें वरण कर लिया॥ ३४॥
तं प्रविष्टं स्त्रियो वीक्ष्य नरवीरं विमोहिताः।
मनसा वव्रिरेऽभीष्टं पतिं दैवोपसादितम्॥ ३४
जब उन राजकुमारियोंने अन्तःपुरमें पधारे हुए नरश्रेष्ठ भगवान् श्रीकृष्णको देखा, तब वे मोहित हो गयीं और उन्होंने उनकी अहैतुकी कृपा तथा अपना सौभाग्य समझकर मन-ही-मन भगवान्को अपने परम प्रियतम पतिके रूपमें वरण कर लिया॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.59.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 508) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/59/34/