श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.59.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 59 · अथैकोनषष्टितमोऽध्यायः

तं प्रविष्टं स्त्रियो वीक्ष्य नरवीरं विमोहिताः।

मनसा वव्रिरेऽभीष्टं पतिं दैवोपसादितम्॥ ३४

taṃ praviṣṭaṃ striyo vīkṣya naravīraṃ vimohitāḥ|

manasā vavrire'bhīṣṭaṃ patiṃ daivopasāditam|| 34

अर्थ

जब उन राजकुमारियोंने अन्तःपुरमें पधारे हुए नरश्रेष्ठ भगवान् श्रीकृष्णको देखा, तब वे मोहित हो गयीं और उन्होंने उनकी अहैतुकी कृपा तथा अपना सौभाग्य समझकर मन-ही-मन भगवान्‌को अपने परम प्रियतम पतिके रूपमें वरण कर लिया॥ ३४॥

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