॥ श्रीहरिः ॥
तत्र राजन्यकन्यानां षट्सहस्राधिकायुतम्।
भौमाहृतानां विक्रम्य राजभ्यो ददृशे हरिः॥ ३३
tatra rājanyakanyānāṃ ṣaṭsahasrādhikāyutam|
bhaumāhṛtānāṃ vikramya rājabhyo dadṛśe hariḥ|| 33
अर्थ
वहाँ जाकर भगवान्ने देखा कि भौमासुरने बलपूर्वक राजाओंसे सोलह हजार राजकुमारियाँ छीनकर अपने यहाँ रख छोड़ी थीं॥ ३३॥
तत्र राजन्यकन्यानां षट्सहस्राधिकायुतम्।
भौमाहृतानां विक्रम्य राजभ्यो ददृशे हरिः॥ ३३
वहाँ जाकर भगवान्ने देखा कि भौमासुरने बलपूर्वक राजाओंसे सोलह हजार राजकुमारियाँ छीनकर अपने यहाँ रख छोड़ी थीं॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.59.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 508) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/59/33/