श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.56

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

श्रुतकीर्तेः सुतां भद्रामुपयेमे पितृष्वसुः।

कैकेयीं भ्रातृभिर्दत्तां कृष्णः सन्तर्दनादिभिः॥ ५६

śrutakīrteḥ sutāṃ bhadrāmupayeme pitṛṣvasuḥ|

kaikeyīṃ bhrātṛbhirdattāṃ kṛṣṇaḥ santardanādibhiḥ|| 56

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णकी फूआ श्रुतकीर्ति केकय-देशमें ब्याही गयी थीं। उनकी कन्याका नाम था भद्रा। उसके भाई सन्तर्दन आदिने उसे स्वयं ही भगवान् श्रीकृष्णको दे दिया और उन्होंने उसका पाणिग्रहण किया॥ ५६॥

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