॥ श्रीहरिः ॥
पारिबर्हमुपागृह्य द्वारकामेत्य सत्यया।
रेमे यदूनामृषभो भगवान् देवकीसुतः॥ ५५
pāribarhamupāgṛhya dvārakāmetya satyayā|
reme yadūnāmṛṣabho bhagavān devakīsutaḥ|| 55
अर्थ
तदनन्तर यदुवंशशिरोमणि देवकीनन्दन भगवान् श्रीकृष्ण उस दहेज और सत्याके साथ द्वारकामें आये और वहाँ रहकर गृहस्थोचित विहार करने लगे॥ ५५॥
पारिबर्हमुपागृह्य द्वारकामेत्य सत्यया।
रेमे यदूनामृषभो भगवान् देवकीसुतः॥ ५५
तदनन्तर यदुवंशशिरोमणि देवकीनन्दन भगवान् श्रीकृष्ण उस दहेज और सत्याके साथ द्वारकामें आये और वहाँ रहकर गृहस्थोचित विहार करने लगे॥ ५५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.58.55 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 503) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/58/55/