श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.57

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

सुतां च मद्राधिपतेर्लक्ष्मणां लक्षणैर्युताम्।

स्वयंवरे जहारैकः स सुपर्णः सुधामिव॥ ५७

sutāṃ ca madrādhipaterlakṣmaṇāṃ lakṣaṇairyutām|

svayaṃvare jahāraikaḥ sa suparṇaḥ sudhāmiva|| 57

अर्थ

मद्रप्रदेशके राजाकी एक कन्या थी लक्ष्मणा। वह अत्यन्त सुलक्षणा थी। जैसे गरुड़ने स्वर्गसे अमृतका हरण किया था, वैसे ही भगवान् श्रीकृष्णने स्वयंवरमें अकेले ही उसे हर लिया॥ ५७॥

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