श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.57.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 57 · अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

गरुडध्वजमारुह्य रथं रामजनार्दनौ।

अन्वयातां महावेगैरश्‍वै राजन् गुरुद्रुहम्॥ १९

garuḍadhvajamāruhya rathaṃ rāmajanārdanau|

anvayātāṃ mahāvegairaśvai rājan gurudruham|| 19

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण और बलराम दोनों भाई अपने उस रथपर सवार हुए, जिसपर गरुड़चिह्नसे चिह्नित ध्वजा फहरा रही थी और बड़े वेगवाले घोड़े जुते हुए थे। अब उन्होंने अपने श्‍वशुर सत्राजित्को मारनेवाले शतधन्वाका पीछा किया॥ १९॥

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