श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.57.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 57 · अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

मिथिलायामुपवने विसृज्य पतितं हयम्।

पद‍्भ्यामधावत् सन्त्रस्तः कृष्णोऽप्यन्वद्रवद् रुषा॥ २०

mithilāyāmupavane visṛjya patitaṃ hayam|

padbhyāmadhāvat santrastaḥ kṛṣṇo'pyanvadravad ruṣā|| 20

अर्थ

मिथिलापुरीके निकट एक उपवनमें शतधन्वाका घोड़ा गिर पड़ा, अब वह उसे छोड़कर पैदल ही भागा। वह अत्यन्त भयभीत हो गया था। भगवान् श्रीकृष्ण भी क्रोध करके उसके पीछे दौड़े॥ २०॥

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