श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.56.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 56 · अथ षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तेषां तु देव्युपस्थानात् प्रत्यादिष्टाशिषा स च।

प्रादुर्बभूव सिद्धार्थः सदारो हर्षयन् हरिः॥ ३६

teṣāṃ tu devyupasthānāt pratyādiṣṭāśiṣā sa ca|

prādurbabhūva siddhārthaḥ sadāro harṣayan hariḥ|| 36

अर्थ

उनकी उपासनासे दुर्गादेवी प्रसन्‍न हुईं और उन्होंने आशीर्वाद दिया। उसी समय उनके बीचमें मणि और अपनी नववधू जाम्बवतीके साथ सफलमनोरथ होकर श्रीकृष्ण सबको प्रसन्‍न करते हुए प्रकट हो गये॥ ३६॥

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