॥ श्रीहरिः ॥
उपलभ्य हृषीकेशं मृतं पुनरिवागतम्।
सह पत्न्या मणिग्रीवं सर्वे जातमहोत्सवाः॥ ३७
upalabhya hṛṣīkeśaṃ mṛtaṃ punarivāgatam|
saha patnyā maṇigrīvaṃ sarve jātamahotsavāḥ|| 37
अर्थ
सभी द्वारकावासी भगवान् श्रीकृष्णको पत्नीके साथ और गलेमें मणि धारण किये हुए देखकर परमानन्दमें मग्न हो गये, मानो कोई मरकर लौट आया हो॥ ३७॥
उपलभ्य हृषीकेशं मृतं पुनरिवागतम्।
सह पत्न्या मणिग्रीवं सर्वे जातमहोत्सवाः॥ ३७
सभी द्वारकावासी भगवान् श्रीकृष्णको पत्नीके साथ और गलेमें मणि धारण किये हुए देखकर परमानन्दमें मग्न हो गये, मानो कोई मरकर लौट आया हो॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 490) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/56/37/