श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.56.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 56 · अथ षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

सत्राजितं शपन्तस्ते दुःखिता द्वारकौकसः।

उपतस्थुर्महामायां दुर्गां कृष्णोपलब्धये॥ ३५

satrājitaṃ śapantaste duḥkhitā dvārakaukasaḥ|

upatasthurmahāmāyāṃ durgāṃ kṛṣṇopalabdhaye|| 35

अर्थ

सभी द्वारकावासी अत्यन्त दुःखित होकर सत्राजित्को भला-बुरा कहने लगे और भगवान् श्रीकृष्णकी प्राप्तिके लिये महामाया दुर्गादेवीकी शरणमें गये, उनकी उपासना करने लगे॥ ३५॥

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