विदर्भदेशके नागरिकोंने जब सुना कि भगवान् श्रीकृष्ण यहाँ पधारे हैं, तब वे लोग भगवान्के निवासस्थानपर आये और अपने नयनोंकी अंजलिमें भर-भरकर उनके वदनारविन्दका मधुर मकरन्द-रस पान करने लगे॥ ३६॥
कृष्णमागतमाकर्ण्य विदर्भपुरवासिनः।
आगत्य नेत्रांजलिभिः पपुस्तन्मुखपंकजम्॥ ३६
विदर्भदेशके नागरिकोंने जब सुना कि भगवान् श्रीकृष्ण यहाँ पधारे हैं, तब वे लोग भगवान्के निवासस्थानपर आये और अपने नयनोंकी अंजलिमें भर-भरकर उनके वदनारविन्दका मधुर मकरन्द-रस पान करने लगे॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.53.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 470) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/53/36/