श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.52.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 52 · अथ द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

नीयमाने धने गोभिर्नृभिश्‍चाच्युतचोदितैः।

आजगाम जरासन्धस्त्रयोविंशत्यनीकपः॥ ६

nīyamāne dhane gobhirnṛbhiścācyutacoditaiḥ|

ājagāma jarāsandhastrayoviṃśatyanīkapaḥ|| 6

अर्थ

जिस समय भगवान् श्रीकृष्णके आज्ञानुसार मनुष्यों और बैलोंपर वह धन ले जाया जाने लगा, उसी समय मगधराज जरासन्ध फिर (अठारहवीं बार) तेईस अक्षौहिणी सेना लेकर आ धमका॥ ६॥✎ 1685

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1685 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: धरती-पर → धरतीपर

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