॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.51.59
श्रीभगवानुवाच
सार्वभौम महाराज मतिस्ते विमलोर्जिता।
वरैः प्रलोभितस्यापि न कामैर्विहता यतः॥ ५९
sārvabhauma mahārāja matiste vimalorjitā|
varaiḥ pralobhitasyāpi na kāmairvihatā yataḥ|| 59
अर्थ
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘सार्वभौम महाराज! तुम्हारी मति, तुम्हारा निश्चय बड़ा ही पवित्र और ऊँची कोटिका है। यद्यपि मैंने तुम्हें बार-बार वर देनेका प्रलोभन दिया, फिर भी तुम्हारी बुद्धि कामनाओंके अधीन न हुई॥ ५९॥