॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.51.38
क्वचिद् रजांसि विममे पार्थिवान्युरुजन्मभिः।
गुणकर्माभिधानानि न मे जन्मानि कर्हिचित्॥ ३८
kvacid rajāṃsi vimame pārthivānyurujanmabhiḥ|
guṇakarmābhidhānāni na me janmāni karhicit|| 38
अर्थ
यह सम्भव है कि कोई पुरुष अपने अनेक जन्मोंमें पृथ्वीके छोटे-छोटे धूल-कणोंकी गिनती कर डाले; परन्तु मेरे जन्म, गुण, कर्म और नामोंको कोई कभी किसी प्रकार नहीं गिन सकता॥ ३८॥